कोलकाता, 24 अप्रैल (भाषा) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को दावा किया कि पश्चिम बंगाल में “परिवर्तन की लहर” पहले चरण के मतदान में स्पष्ट हो गई है और कहा कि “भाजपा के पक्ष में” दिखाया गया समर्थन विधानसभा चुनावों में उसकी जीत का शंखनाद है।
उत्तर 24 परगना में दम दम लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत पनिहाटी में एक रैली को संबोधित करते हुए, मोदी ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ टीएमसी ने बंगाल में “तानाशाही” के माध्यम से “लोकतंत्र के मंदिर को कुचल दिया”, लेकिन कहा कि राज्य के लोगों ने अपने जनादेश के माध्यम से इसका “पुनर्निर्माण” करना शुरू कर दिया है।
उन्होंने कहा, “परिवर्तन की जो लहर बंगाल में लंबे समय से दिखाई दे रही थी – कल के पहले चरण के मतदान ने उस पर मुहर लगा दी है। कल भाजपा के पक्ष में जो समर्थन दिखा, उसने उसकी जीत का शंखनाद कर दिया है।”
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में गुरुवार को 3.60 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 92 प्रतिशत ने मतदान किया।
प्रधानमंत्री ने कहा, “बंगाल में जहां टीएमसी ने अपनी तानाशाही से लोकतंत्र के मंदिर को कुचल दिया था, वहां लोगों ने लोकतंत्र के मंदिर का पुनर्निर्माण शुरू कर दिया है। अब दूसरे चरण में आपको इस मंदिर पर विजय पताका फहरानी है।”
उन्होंने दावा किया कि पहले चरण के मतदान के बाद टीएमसी “बेहद परेशान” थी और आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल ने रात भर अपने “गुंडों” को जुटाया था।
प्रधान मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि 4 मई को चुनाव परिणाम के बाद, “टीएमसी के गुंडों” के पास छिपने के लिए कोई जगह नहीं होगी।
उन्होंने दावा किया, ''पहले चरण के मतदान ने टीएमसी के 'महा जंगल राज' के अंत को चिह्नित किया है।''
महिला सुरक्षा को लेकर सत्तारूढ़ पार्टी पर अपना हमला तेज करते हुए मोदी ने टीएमसी को “महिला विरोधी पार्टी” बताया और कहा कि भाजपा “महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास मॉडल” में विश्वास करती है।
भाजपा द्वारा मैदान में उतारी गई महिला उम्मीदवारों का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि पार्टी ने उन लोगों को प्रतिनिधित्व दिया है जिन्होंने अन्याय सहा है।
मोदी ने पार्टी के पानीहाटी उम्मीदवार और आरजी कर बलात्कार-हत्या पीड़िता की मां का जिक्र करते हुए कहा, “इस मां ने अपनी बेटी को डॉक्टर बनने में मदद की। लेकिन टीएमसी ने उस बेटी को उनसे छीन लिया। हमने उस मां को उम्मीदवार बनाया है।”
मोदी ने आरोप लगाया, ''भाजपा ने संदेशखाली की पीड़िता को भी नेतृत्व करने का मौका दिया है। जब बंगाल की महिलाएं न्याय मांगती हैं, तो टीएमसी उनसे कहती है कि वे अपने घरों से बाहर न निकलें।''
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