- केरल विधानसभा में भाजपा की बढ़त धर्मनिरपेक्ष दलों के लिए गंभीर खतरा है।
- छह निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा का दूसरे स्थान पर रहना चिंता पैदा करता है।
- वामपंथ से यूडीएफ में वोट लीक की विस्तृत जांच की आवश्यकता है।
- सीपीआई और एलडीएफ कमियों का अध्ययन करेंगे और बदलाव लागू करेंगे।
तिरुवनंतपुरम, छह मई (भाषा) सीपीआई के राज्य सचिव बिनॉय विश्वम ने बुधवार को कहा कि केरल विधानसभा चुनाव में तीन सीटें जीतने वाली भाजपा को सभी धर्मनिरपेक्ष दलों को गंभीरता से लेने की जरूरत है क्योंकि यह राज्य की राजनीति के लिए “खतरा” है।
विश्वम ने यहां पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि भाजपा ने न केवल तीन सीटें जीतीं, बल्कि छह निर्वाचन क्षेत्रों में दूसरे स्थान पर रही, जो चिंता का विषय भी है।
उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि जब-जब अति दक्षिणपंथी राजनीति ने अपनी पकड़ मजबूत की, तो न सिर्फ केरल बल्कि पूरे देश में इसका बड़ा प्रभाव पड़ा।
इससे निपटने के लिए देश की सभी वामपंथी और धर्मनिरपेक्ष ताकतों को विस्तार से अध्ययन करने की जरूरत है।
विश्वम ने कहा कि पार्टी को यह भी अध्ययन करने की जरूरत है कि एलडीएफ की हार किस कारण हुई।
उन्होंने कहा कि वाम मोर्चे से यूडीएफ को वोटों का पर्याप्त रिसाव हुआ, जिसका एलडीएफ पार्टियों में से किसी ने हिसाब नहीं दिया और इसके कारणों की जांच की जानी चाहिए।
सीपीआई राज्य सचिव ने कहा कि इसके लिए जिला और राज्य स्तर पर बैठकें आयोजित की जाएंगी और जहां आवश्यक होगा, आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।
उन्होंने कहा, ''हम गंभीरता से अध्ययन करेंगे कि क्या कमियां थीं और हम कहां विफल रहे, और फिर अपेक्षित बदलाव और सुधार किए जाएंगे।'' उन्होंने आगे कहा कि सभी 140 सीटों के परिणामों की जांच की जाएगी। उन्होंने आगे कहा कि सीपीआई और एलडीएफ हार के कारण राज्य की राजनीति नहीं छोड़ेंगे क्योंकि वे केवल लोगों के लिए काम करके ही आगे बढ़ सकते हैं।
राज्य में 9 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में यूडीएफ ने 102 सीटें जीतीं, एलडीएफ को 35 और भाजपा को 3 सीटें मिलीं। पीटीआई एचएमपी आरओएच
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